डिजिटल मॉर्डन होंगी भारतीय अदालतें करोड़ों की लागत से किया जाएगा दस्तावेजों का डिजिटलीकरण

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करोड़ों की लागत से किया जाएगा दस्तावेजों का डिजिटलीकरण- तकनिकी के बेहतर प्रयोग से  न्याय व्यवस्था को अंजाम के लिए सुगम और सुलभ बनाने के लिए सरकार के कदम इसके पूर्ण डिजिटलकरण की तरफ बढ़ रहे हैं।

 तीसरे चरण की मंजूरी दे दी है

 ई कोर्ट मिशन मोड प्रोजेक्ट को विस्तार देते हुए कैबिनेट ने इसके तीसरे चरण को  मंजूरी दे रही है. इस परियोजना पर सरकार  अगले 4 सालों में  7210 करोड़  रुपए खर्च करेगी।

 इसके तहत न्यायपालिका  के लिए एकीकृत प्रौद्योगिकी मंच बनाया जाएगा जो अदालत वादियों व अन्य हितधारकों को सहज एवं कागज रहित इंटरफेस या विंडो उपलब्ध कराएगा।

 सेवाओं को हासिल कर सकेंगे

 जो नागरिक तकनीकी में ज्यादा दक्ष नहीं है वह ई सेवा केंद्र  के जरिए न्यायिक सेवाओं को हासिल कर सकते हैं। बताना चाहते हैं कि ई कोर्ट का पहला चरण 2007 में शुरू हुआ था।

 इसके अलावा दूसरा चरण हाल ही में खत्म हुआ है। परियोजना के तहत 4 सालों में न्यायालयों को डिजिटल पेपरलेस  और ऑनलाइन बनाना है.

 ई सेवा केंद्र स्थापित किए जाएंगे

 सारे कोर्ट रिकॉर्ड का डिजिटलकरण करने के साथ-साथ ई-फाइलिंग ई भुगतान करने की  व्यवस्था की जाएगी. न्यायलय परिसरों में  4400  ई सेवा केंद्र स्थापित किए जाएंगे.

इस परियोजना के तहत यातायात चालान के मामले में ई कोर्ट के माध्यम से बिना अधिवक्ताओं के उपस्थितियों के ही निपटाने की व्यवस्था है।

 इसलिए बढ़ावा देना चाहती है 

  अभियुक्तों की वर्चुअल पेशी को बढ़ाने का लक्ष्य है। जोर है कि समन की ऑटोमेटेड डिलीवरी नेशनल सर्विंग एंड ट्रैकिंग  आफ इलेक्ट्रानिक प्रोसेसेज के माध्यम से हो रहा है. ताकि मुकदमा में ट्रायल मे अधिक समय ना लगे.

 सरकारी ई कोर्ट को इसलिए बढ़ावा देना चाहती है ताकि तकनीकी के प्रयोग के मामले में  जल्द निस्तारण हो और न्यायालयों पर से मुकदमों का बोझ कम हो। इसकी मदद से इंटेलिजेंट स्मार्ट सिस्टम की स्थापना हो जाएगी। इससे सभी काम करने में आसानी हो जाएगी।

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